Dhanteras 2025 : इस साल धनतेरस लोगों के लिए दोहरा शुभ लाभ लेकर आ रहा है। यह पर्व इस बार केवल गणेश समेत मां लक्ष्मी के आगमन का मार्ग नहीं लेकिन लोगों के लिए संतति कल्याण का मार्ग भी है। क्योंकि इस बार धनतेरस और भगवान धनवंतरी जयंती के साथ लोगों को शनि प्रदोष का संयोग भी प्राप्त हो रहा है। धनतेरस पर विघ्न विनायक भगवान गणेश समेत मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन अर्चन जहां धन संपदा ऐश्वर्य और सांसारिक सुखों की प्राप्ति कराता है। वहीं आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरी की पूजा मनुष्य को आरोग्य लाभ प्रदान करती है। लेकिन इस बार शनि प्रदोष पर भगवान शिव की उपासना का भी अवसर प्राप्त हो रहा है।
शनि प्रदोष क्या है
शनि प्रदोष के दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन अर्चन प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिए और इससे उसे हर दुखों से मुक्ति मिलती है। इस तरह यह पर्व सुख सौभाग्य स्वास्थ्य के साथ कल्याण लेकर भी आता है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस साल धनतेरस और भगवान धनवंतरी जयंती कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी शनिवार को है।
उस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी प्राप्त होने से धनतेरस पर शनि प्रदोष का शुभ संयोग भी बन रहा है। सनातन धर्म में हर महीने की प्रदोष व्यापनी दोनों त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव के पूजन का विधान है। अगर त्रयोदशी की तिथि शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि प्रदोष कहा जाता है।

शनि प्रदोष की मान्यता
शास्त्रीय मान्यता है कि शनि प्रदोष के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करने से निसंतान को भी संतान की प्राप्ति होती है और इसी के साथ ही लोगों के जीवन का कल्याण होता है। इस दिन श्रद्धालु को विधिविधान से भगवान गणेश समेत मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धनवंतरी के साथ भगवान शिव और संकट मोचन हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए।
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धनतेरस की पूजा कैसे करें, शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2025
पंडित जी बताते हैं कि सूर्यास्त के बाद 2 घंटे 24 मिनट का काल प्रदोष काल कहा जाता है। इस काल में ही मां लक्ष्मी भगवान कुबेर भगवान धनवंतरी की पूजा की जाती है और उनके आगमन के लिए दीप जलाए जाते हैं। बहुत से सनातनी श्रद्धालु पारंपरिक रूप से प्रदोष व्रत रख के भगवान शिव की आराधना करते हैं।
वह भगवान शिव के साथ बजरंगबली की उपासना कर उन्हें नौ बत्तियों वाला घी का दीपक जलाते हैं और सच्चे मन से आराधना करते हैं। वहीं पंडित जी बताते हैं कि अगर किसी की कुंडली में शनि दोष हो या संतान प्राप्ति में बाधा या विलंब का योग हो तो उसे शनि प्रदोष का व्रत जरूर रखना चाहिए। इससे भगवान शिव और बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और शनि दोष समेत बाकी सभी दोषों से छुटकारा मिलता है।
